श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  3.6.247 
तोमारे पाठाइते पत्री पाठाइल मोरे ।
झाङ्करा हइते तोमा ना पा ञा गेल घरे ॥247॥
 
 
अनुवाद
“उन्होंने मुझे पत्र लिखकर तुम्हें वापस भेजने को कहा था, लेकिन जब उन दस आदमियों को तुम्हारे बारे में कोई सूचना नहीं मिली, तो वे झांकरा से घर लौट गए।”
 
“They wrote me a letter asking me to send you back, but when those ten men did not get any information about you, they returned home from Jhaankara.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)