vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट
»
श्लोक 245
श्लोक
3.6.245
रघुनाथ - दास यबे सबारे मिलिला ।
अद्वैत - आचार्य ताँरे बहु कृपा कैला ॥245॥
अनुवाद
जब रघुनाथदास सभी भक्तों से मिले, तो अद्वैत आचार्य ने उन पर बड़ी दया दिखाई।
When Raghunatha Dasa met all the devotees, Advaita Acharya showered great grace upon them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×