श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 245
 
 
श्लोक  3.6.245 
रघुनाथ - दास यबे सबारे मिलिला ।
अद्वैत - आचार्य ताँरे बहु कृपा कैला ॥245॥
 
 
अनुवाद
जब रघुनाथदास सभी भक्तों से मिले, तो अद्वैत आचार्य ने उन पर बड़ी दया दिखाई।
 
When Raghunatha Dasa met all the devotees, Advaita Acharya showered great grace upon them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)