श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 236
 
 
श्लोक  3.6.236 
ग्राम्य - कथा ना शुनिबे, ग्राम्य - वार्ता ना कहिबे ।
भाल ना खाइबे आर भाल ना परिबे ॥236॥
 
 
अनुवाद
"आम लोगों की तरह बात मत करो, न ही उनकी बातें सुनो। तुम्हें बहुत स्वादिष्ट खाना नहीं खाना चाहिए, न ही बहुत अच्छे कपड़े पहनने चाहिए।
 
"Don't talk like ordinary people or listen to what they say. Don't eat delicious food or wear beautiful clothes."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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