श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  3.6.228 
आर दिन रघुनाथ स्वरूप - चरणे ।
आपनार कृत्य लागि’ कैला निवेदने ॥228॥
 
 
अनुवाद
अगले दिन रघुनाथदास ने भगवान दामोदर के चरण कमलों में अपने कर्तव्य के विषय में पूछा।
 
The next day Raghunath Das presented his request regarding his duty at the lotus feet of Swarup Damodar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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