श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 224
 
 
श्लोक  3.6.224 
वैरागी ह ञा येबा करे परापेक्षा ।
कार्य - सिद्धि नहे, कृष्ण करेन उपेक्षा ॥224॥
 
 
अनुवाद
"एक वैरागी [संन्यासी] को दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि वह ऐसा करता है, तो वह असफल होगा और कृष्ण उसकी उपेक्षा करेंगे।
 
"A recluse (renunciate) should not depend on others. If he does so, he will fail and be neglected by Krishna."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd