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श्लोक 3.6.216  |
सिंह - द्वारे अन्नार्थी वैष्णवे देखियो ।
पसारिर ठाञि अन्न देन कृपा त’ करिया ॥216॥ |
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| अनुवाद |
| यदि वे किसी वैष्णव को सिंहद्वार पर भिक्षा मांगते हुए देखते हैं, तो दयावश वे दुकानदारों से मिलकर उसे कुछ खाने को देने की व्यवस्था करते हैं। |
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| If he sees a Vaishnava standing at the Singha Gate begging for alms, he kindly arranges for him to get something to eat from the shopkeeper. |
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