श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  3.6.216 
सिंह - द्वारे अन्नार्थी वैष्णवे देखियो ।
पसारिर ठाञि अन्न देन कृपा त’ करिया ॥216॥
 
 
अनुवाद
यदि वे किसी वैष्णव को सिंहद्वार पर भिक्षा मांगते हुए देखते हैं, तो दयावश वे दुकानदारों से मिलकर उसे कुछ खाने को देने की व्यवस्था करते हैं।
 
If he sees a Vaishnava standing at the Singha Gate begging for alms, he kindly arranges for him to get something to eat from the shopkeeper.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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