श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  3.6.207 
“पथे इँह करियाछे बहुत लङ्घन ।
कत - दिन कर इहार भाल सन्तर्पण” ॥207॥
 
 
अनुवाद
"रास्ते में रघुनाथदास ने कई दिनों तक उपवास और कष्ट सहे हैं। इसलिए कुछ दिनों तक उनकी अच्छी तरह देखभाल करना ताकि वे तृप्त होकर भोजन कर सकें।"
 
"Raghunatha Dasa has fasted for many days on the way and endured many hardships. So please take good care of him for a few days so that he can eat to his heart's content."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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