श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  3.6.200 
“हेन ‘विषय’ हैते कृष्ण उद्धारिला तोमा’ ।
या कहन ना याय कृष्ण - कृपार महिमा” ॥200॥
 
 
अनुवाद
"भगवान कृष्ण ने अपनी स्वेच्छा से तुम्हें ऐसे निंदित भौतिक जीवन से मुक्ति दिलाई है। इसलिए भगवान कृष्ण की अहैतुकी कृपा की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता।"
 
"Lord Krishna has voluntarily rescued you from this despicable materialistic life. Therefore, Lord Krishna's causeless mercy cannot be expressed."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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