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श्लोक 3.6.200  |
“हेन ‘विषय’ हैते कृष्ण उद्धारिला तोमा’ ।
या कहन ना याय कृष्ण - कृपार महिमा” ॥200॥ |
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| अनुवाद |
| "भगवान कृष्ण ने अपनी स्वेच्छा से तुम्हें ऐसे निंदित भौतिक जीवन से मुक्ति दिलाई है। इसलिए भगवान कृष्ण की अहैतुकी कृपा की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता।" |
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| "Lord Krishna has voluntarily rescued you from this despicable materialistic life. Therefore, Lord Krishna's causeless mercy cannot be expressed." |
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