श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 183
 
 
श्लोक  3.6.183 
बाहुड़िया सेइ दश जन आइल घर ।
ताँर माता - पिता हइल चिन्तित अन्तर ॥183॥
 
 
अनुवाद
दस आदमी घर लौट आये, और रघुनाथदास के माता-पिता चिंता से भर गये।
 
All ten people returned home. Raghunath Das's parents became extremely worried.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)