श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  3.6.180 
शिवानन्दे पत्री दिल विनय करिया ।
‘आमार पुत्रेरे तुमि दिबा बाहुड़िया’ ॥180॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथ दास के पिता ने शिवानन्द सेना को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बड़ी विनम्रता से अनुरोध किया, “कृपया मेरे पुत्र को लौटा दीजिए।”
 
Raghunath Das's father wrote a letter to Shivananda Sen and requested him very politely, "Please send my son back."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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