श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  3.6.174 
पञ्च - दश - क्रोश - पथ च लि’ गेला एक - दिने ।
सन्ध्या - काले रहि ला एक गोपेर बाथाने ॥174॥
 
 
अनुवाद
वह एक दिन में लगभग तीस मील पैदल चलते थे और शाम को एक ग्वाले की गौशाला में विश्राम करते थे।
 
He walked about thirty miles in a day and in the evening he rested in a cowshed of a cowherd.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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