श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.6.17 
हेन - काले मुलुकेर एक म्लेच्छ अधिकारी ।
सप्तग्राम - मुलुकेर से हय ‘चौधुरी’ ॥17॥
 
 
अनुवाद
उस समय वहां एक मुस्लिम अधिकारी सप्तग्राम का कर वसूल करता था।
 
At that time a Muslim officer used to collect taxes from Saptagram.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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