श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  3.6.167 
आचा र्येर घर इहार पूर्व - दिशाते ।
कहिते शुनिते दुँहे चले सेइ पथे ॥167॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथदास के घर के पूर्व में यदुनंदन आचार्य का घर था। यदुनंदन आचार्य और रघुनाथदास उस घर की ओर जाते हुए आपस में बातें कर रहे थे।
 
To the east of Raghunath Das's house was Yadunandan Acharya's house. They both talked to each other as they walked towards the house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)