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श्लोक 3.6.149  |
अनेक ‘प्रसाद’ दिला पथे खाइबारे ।
तबे पुनः रघुनाथ कहे पण्डितेरे ॥149॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने रघुनाथदास को घर जाते समय खाने के लिए ढेर सारा प्रसाद दिया। फिर रघुनाथदास ने राघव पंडित से फिर बात की। |
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| He gave Raghunath Das a lot of Prasad to eat on the way. Then Raghunath Das again spoke to Raghava Pandit. |
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