श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  3.6.138 
तबे रघुनाथे प्रभु निकटे बोलाइला ।
ताँर माथे पद धरि कहिते लागिला ॥138॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान नित्यानंद प्रभु ने रघुनाथदास को अपने पास बुलाया, अपने चरणकमल रघुनाथदास के सिर पर रखे और बोलना शुरू किया।
 
Then Nityananda Prabhu called Raghunatha Das to him, placed his feet on his head and spoke to him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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