बिड़ा खाओयाइला, कैला चरण वन्दन ।
भक्त - गणे दिला बिड़ा, माल्य - चन्दन ॥121॥
अनुवाद
राघव पंडित ने उन्हें पान-सुपारी अर्पित की और उनके चरण-कमलों की पूजा की। उन्होंने भक्तों को पान-सुपारी, पुष्प-मालाएँ और चंदन-पुष्प भी वितरित किए।
Raghava Pandit offered him a betel leaf and worshipped his feet. He also offered betel leaves, garlands of flowers, and sandalwood paste to his devotees.