श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  3.6.121 
बिड़ा खाओयाइला, कैला चरण वन्दन ।
भक्त - गणे दिला बिड़ा, माल्य - चन्दन ॥121॥
 
 
अनुवाद
राघव पंडित ने उन्हें पान-सुपारी अर्पित की और उनके चरण-कमलों की पूजा की। उन्होंने भक्तों को पान-सुपारी, पुष्प-मालाएँ और चंदन-पुष्प भी वितरित किए।
 
Raghava Pandit offered him a betel leaf and worshipped his feet. He also offered betel leaves, garlands of flowers, and sandalwood paste to his devotees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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