श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.6.112 
पाक क रि’ राघव यबे भोग लागाय ।
महाप्रभुर लागि’ भोग पृथक्वाड़य ॥112॥
 
 
अनुवाद
जब राघव पंडित खाना पकाने के बाद भगवान को भोजन अर्पित करते थे, तो वे श्री चैतन्य महाप्रभु के लिए एक अलग प्रसाद बनाते थे।
 
When Raghava Pandit cooked food and offered it to the Deity, he would make a separate offering for Sri Chaitanya Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)