श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  3.6.104 
नित्यानन्देर नृत्य, - येन ताँहार नर्तने।
उपमा दिबार नाहि ए - तिन भुवने ॥104॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद प्रभु के नृत्य की तुलना श्री चैतन्य महाप्रभु के नृत्य के समान इन तीनों लोकों में किसी भी चीज़ से नहीं की जा सकती।
 
Like the dance of Sri Chaitanya Mahaprabhu, the dance of Nityananda Prabhu cannot be compared to anything in these three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)