श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  3.6.102 
भक्त सब नाचा नित्यानन्द - राय ।
शेषे नृत्य करे प्रेमे जगत् भासाय ॥102॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद प्रभु ने सर्वप्रथम सभी भक्तों को नृत्य करने के लिए प्रेरित किया, और अंत में उन्होंने स्वयं नृत्य करना प्रारंभ कर दिया, जिससे सम्पूर्ण जगत आनंदमय प्रेम में डूब गया।
 
First, Nityananda Prabhu inspired all his devotees to dance, and finally, he himself began to dance. In this way, he filled the entire world with the ecstasy of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)