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श्लोक 61
श्लोक
3.5.61
आनेर कि कथा, तुमि - प्रभुर उपदेष्टा! ।
आमि त’ भिक्षुक विप्र, तुमि - मोर पोष्टा ॥61॥
अनुवाद
"आप तो श्री चैतन्य महाप्रभु के भी गुरु हैं, औरों की तो बात ही क्या। मैं तो एक भिखारी ब्राह्मण हूँ, और आप मेरे पालनहार हैं।"
"You are even the teacher of Sri Chaitanya Mahaprabhu, what about others? I am just a beggar Brahmin, and you are my protector."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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