श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.5.55 
राय - पाश गेल, राय प्रणति करिल ।
“आज्ञा कर, ये ला गि’ आगमन हैल” ॥55॥
 
 
अनुवाद
प्रद्युम्न मिश्र रामानन्द राय के पास गए, जिन्होंने उन्हें आदरपूर्वक प्रणाम किया और कहा, "कृपया मुझे आदेश दें। आप किस उद्देश्य से आए हैं?"
 
Pradyumna Mishra went to Ramanand Rai, who greeted him respectfully and said, "Please leave. What business have you come for?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd