श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.5.4 
एक - दिन प्रद्युम्न - मिश्र प्रभुर चरणे ।
दण्डवत् करि’ किछु करे निवेदने ॥4॥
 
 
अनुवाद
एक दिन प्रद्युम्न मिश्र श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने आये और बड़े ही विनम्र भाव से उन्हें प्रणाम किया तथा उनसे प्रश्न किया।
 
One day a devotee named Pradyumna Mishra came to Sri Chaitanya Mahaprabhu and after prostrating before him, started making a request with utmost humility.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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