श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.5.30 
तोमार आगमने मोर पवित्र हैल घर ।
आज्ञा कर, क्या करें तोमार किङ्कर ॥30॥
 
 
अनुवाद
"आपके आगमन से मेरा पूरा घर पवित्र हो गया है। कृपया मुझे आदेश दें। मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ? मैं आपका सेवक हूँ।"
 
"My entire home has been sanctified by your arrival. Please give me orders. What can I do for you? I am your servant."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)