श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  3.5.144 
याहा हैते अन्य पुरुष - सकल - ‘अधम’ ।
सेइ हय ‘पुरुषाधम’ - सरस्वतीर मन ॥144॥
 
 
अनुवाद
“माँ सरस्वती ‘पुरुषधाम’ का अर्थ ‘पुरुषोत्तम’ लेती हैं, ‘वह जिसके अधीन सभी मनुष्य हैं।’
 
Mother Saraswati interprets ‘Purusadham’ to mean Purushottam – ‘the one under whose control all human beings are.’
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd