श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  3.5.133 
तबेत पाण्डित्य तोमार हइबे सफल ।
कृष्णेर स्वरूप - लीला वर्णिबा निर्मल ॥133॥
 
 
अनुवाद
"केवल श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके भक्तों के सिद्धांतों का पालन करने से ही आपकी शिक्षा सफल होगी। तभी आप भौतिक कल्मष से मुक्त होकर कृष्ण की दिव्य लीलाओं के बारे में लिख पाएँगे।"
 
Only when you follow the principles of Sri Chaitanya Mahaprabhu and his devotees will your learning be successful. Only then will you be able to write about Krishna's transcendental pastimes without material contamination.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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