vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना
»
श्लोक 130
श्लोक
3.5.130
तार दुःख देखि, स्वरूप सदय - हृदय ।
उपदेश कैला तारे यैछे ‘हित’ हय ॥130॥
अनुवाद
कवि की अप्रसन्नता देखकर, स्वरूप दामोदर गोस्वामी, जो स्वभावतः बहुत दयालु थे, ने उन्हें सलाह दी ताकि उन्हें कुछ लाभ मिल सके।
Seeing the poet's sorrow, Damodar Goswami, who was very kind, gave him some advice so that he could get some benefit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×