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अनुवाद
"हे मेरे प्रभु, मैं आपके वर्तमान शाश्वत आनंद और ज्ञानमय रूप से श्रेष्ठ कोई रूप नहीं देखता। आध्यात्मिक आकाश में आपके निराकार ब्रह्म तेज में, न तो कभी-कभार परिवर्तन होता है और न ही आंतरिक शक्ति का ह्रास होता है। मैं आपकी शरण में आता हूँ क्योंकि जहाँ मुझे अपने भौतिक शरीर और इंद्रियों पर गर्व है, वहीं आप ही इस ब्रह्मांडीय जगत के कारण हैं। फिर भी आप पदार्थ से अछूते हैं।
“O my Lord, I do not see any other form of Yours superior to this form of eternal bliss and knowledge.
तात्पर्य
"इस वर्तमान स्वरूप या परम पुरुषोत्तम शि श्री कृष्ण द्वारा विस्तारित किसी दिव्य स्वरूप को सभी ब्रह्मांडो के लिए समान रूप से शुभ माना गया है। क्योंकि आपने यह नित्य वैयक्तिक स्वरूप प्रकट किया है जिस पर भक्त ध्यान करते हैं, इसलिए मैं आपको सादर प्रणाम करता हूं। जो नरक के मार्ग पर जाने के लिए नियत हैं, वे सांसारिक विषयों पर विचार-विमर्श के कारण आपके वैयक्तिक स्वरूप की उपेक्षा करते हैं।' श्रीमद-भागवतम (3.9.3-4) के इन छंदों को भगवान ब्रह्मा ने कहा था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥