श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.5.113 
श्लोक शुनि’ सर्व - लोक ताहारे बाखाने ।
स्वरूप कहे , - “एइ श्लोक करह व्याख्याने” ॥113॥
 
 
अनुवाद
जब सभी उपस्थित लोगों ने यह श्लोक सुना तो उन्होंने कवि की सराहना की, किन्तु स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने उनसे अनुरोध किया, “कृपया इस श्लोक की व्याख्या करें।”
 
When the people present heard this verse, everyone praised the poet, but Svarupa Damodara Goswami requested him, “Please explain this verse.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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