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श्लोक 3.5.11  |
तबे प्रद्युम्न - मिश्र गेला रामानन्देर स्थाने ।
रायेर सेवक ताँरे वसाइल आसने ॥11॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु के इस प्रकार कहने पर प्रद्युम्न मिश्र रामानन्द राय के घर गए। वहाँ रामानन्द राय के सेवक ने उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान दिया। |
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| After being advised in this manner by Sri Chaitanya Mahaprabhu, Pradyumna Mishra went to Ramanand Rai's house. |
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