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अनुवाद
“ऐसे व्यक्ति की कविता सुनने से, जिसे दिव्य ज्ञान नहीं है और जो स्त्री-पुरुष के बीच के संबंधों के बारे में लिखता है, केवल दुःख होता है, जबकि परमानंद प्रेम में पूरी तरह लीन भक्त के शब्दों को सुनने से महान सुख होता है।
“Listening to the poetry of a person who has no divine knowledge and who writes about the mutual relations between man and woman brings only sorrow, whereas listening to the words of a devotee immersed in love brings supreme happiness.”
तात्पर्य
ग्राम्य-कवि का अर्थ ऐसे कवि या लेखक से है जैसे कि उपन्यासों और अन्य काल्पनिक कथाओं के लेखक, जो केवल पुरुष और महिला के बीच के संबंधों के बारे में लिखते हैं। विदग्ध-आत्मीय-वाक्य, हालांकि, एक भक्त द्वारा लिखे गए शब्दों को संदर्भित करता है जो शुद्ध भक्ति सेवा को पूरी तरह से समझता है। ऐसे भक्त, जो परंपरा प्रणाली का पालन करते हैं, को कभी-कभी सजातिय-आशय-स्निग्ध, या "इसी श्रेणी के लोगों को प्रिय" के रूप में वर्णित किया जाता है। केवल ऐसे भक्तों की कविता और अन्य लेखन भक्तों द्वारा बहुत खुशी के साथ स्वीकार किए जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥