श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.4.96 
ये कराइते चाहे ईश्वर, सेइ सिद्ध हय ।
तोमार सौभाग्य एइ कहिलुँ निश्चय ॥96॥
 
 
अनुवाद
"परम पुरुषोत्तम भगवान हमसे जो भी करवाना चाहते हैं, वह सफलतापूर्वक पूरा होगा। यह आपका सौभाग्य है। यह मेरी परिपक्व राय है।"
 
"Whatever the Supreme Personality of Godhead wants us to do will be accomplished successfully. This is your great fortune. This is my firm opinion."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)