श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.4.94 
तोमार देह कहेन प्रभु मोर निज - धन ।
तोमा - सम भाग्यवान् नाहि कोन जन ॥94॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आपके शरीर को अपनी संपत्ति मान लिया है। इसलिए सौभाग्य में कोई भी आपकी बराबरी नहीं कर सकता।
 
"Sri Chaitanya Mahaprabhu has accepted your body as his personal treasure. Therefore, your good fortune is beyond comparison."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)