श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  3.4.93 
सनातने कहे हरिदास क रि’ आलिङ्गन ।
“तोमार भाग्येर सीमा ना याय कथन” ॥93॥
 
 
अनुवाद
“मेरे प्रिय सनातन,” हरिदास ठाकुर ने उसे गले लगाते हुए कहा, “कोई भी तुम्हारे सौभाग्य की सीमा नहीं जान सकता।
 
Haridasa Thakura embraced Sanatana and said, “O dear Sanatana, no one can reach the limit of your good fortune.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd