श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.4.92 
तबे महाप्रभु करि’ हुँहारे आलिङ्गन ।
‘मध्याह्न’ करिते उठि’ करिला गमन ॥92॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु ने हरिदास ठाकुर और सनातन गोस्वामी दोनों को गले लगाया और फिर उठकर अपने मध्याह्न के कार्य करने के लिए चले गए।
 
In this way Sri Chaitanya Mahaprabhu embraced both Haridasa Thakura and Sanatana Goswami and then stood up and went to perform the afternoon rituals.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd