श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.4.91 
“एतादृश तुमि इँहारे करियाछ अङ्गीकार ।
एत सौभाग्य इहाँ ना हय काहार” ॥91॥
 
 
अनुवाद
“मेरे प्रिय महोदय, चूँकि आप जैसे महान व्यक्तित्व ने सनातन गोस्वामी को स्वीकार किया है, वे बहुत भाग्यशाली हैं; कोई भी उनके समान भाग्यशाली नहीं हो सकता।”
 
"My dear sir, since a great man like you has accepted Sanatana Goswami, he is extremely fortunate. No one else can be as fortunate as him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)