श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  3.4.89 
हरिदास कहे , - “मिथ्या अभिमान करि ।
तोमार गम्भीर हृदय बुझिते ना पारि” ॥89॥
 
 
अनुवाद
हरिदास ठाकुर ने उत्तर दिया, "हमें अपनी क्षमताओं पर झूठा अभिमान है। वास्तव में हम आपके गहरे इरादों को समझ नहीं सकते।"
 
Haridasa Thakura replied, "We are falsely proud of our abilities. In fact, we cannot understand your profound thoughts."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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