“परेर स्थाप्य द्रव्य केह ना खाय, विलाय ।
निषेधिह इँहारे , - येन ना करे अन्याय” ॥88॥
अनुवाद
"जिस व्यक्ति को किसी दूसरे की संपत्ति सौंपी जाती है, वह उसे न तो बाँटता है और न ही अपने कामों के लिए इस्तेमाल करता है। इसलिए उसे समझाइए कि वह ऐसा कोई गैरकानूनी काम न करे।"
“He who is entrusted with someone else's wealth neither distributes it nor uses it for his own use.