श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.4.76 
प्रभु कहे, - “तोमार देह मोर निज - धन ।
तुमि मोरे करियाछ आत्म - समर्पण” ॥76॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "तुम्हारा शरीर मेरी संपत्ति है। तुम पहले ही मुझे समर्पित हो चुके हो। इसलिए अब तुम्हारा अपने शरीर पर कोई अधिकार नहीं है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Your body is my property. You have already surrendered it to me. Therefore, you no longer have any rights over your body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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