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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट
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श्लोक 7
श्लोक
3.4.7
जगन्नाथे गेले ताँर दर्शन ना पाइमु ।
प्रभुर दर्शन सदा करिते नारिमु ॥7॥
अनुवाद
“जब मैं जगन्नाथ पुरी जाऊंगा, तो मैं भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर पाऊंगा, न ही मैं हमेशा श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन कर पाऊंगा।
“When I go to Jagannath Puri, I will neither be able to see Jagannathji, nor will I be able to see Sri Chaitanya Mahaprabhu forever.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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