श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.4.68 
दीनेरे अधिक दया करे भगवान् ।
कुलीन, पण्डित, धनीर बड़ अभिमान ॥68॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण सदैव विनम्र एवं विनीत लोगों के पक्षधर होते हैं, किन्तु कुलीन, विद्वान् एवं धनवान लोग सदैव अपने पद पर गर्व करते हैं।
 
“The Supreme Personality of Godhead, Sri Krishna, is always kind to the poor and the suffering, but the noble, the learned, and the wealthy are always proud of their positions.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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