श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.4.55 
सनातन, देह - त्यागे कृष्ण यदि पाइये ।
कोटि - देह क्षणेके तबे छाड़िते पारिये ॥55॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "मेरे प्रिय सनातन, यदि मैं आत्महत्या करके कृष्ण को प्राप्त कर सकता, तो मैं बिना किसी हिचकिचाहट के लाखों शरीर त्याग देता।
 
He said, “O Sanatana, if I can attain Krishna by committing suicide, I will have no hesitation in giving up millions of bodies.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)