श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.4.44 
ये वंशेर उपरे तोमार हय कृपा - लेश ।
सकल मङ्गल ताहे खण्डे सब क्लेश ॥44॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्रिय प्रभु, जिस परिवार पर आप थोड़ी सी भी दया करते हैं वह सदैव भाग्यशाली होता है, क्योंकि ऐसी दया से सभी दुख दूर हो जाते हैं।"
 
“O Lord, the race on which You bestow even the slightest mercy is always fortunate, for with such mercy all sufferings vanish.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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