श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.4.39 
सब रात्रि क्रन्दन क रि’ कैल जागरण ।
प्रातः - काले आमा - दुँहाय कैल निवेदन ॥39॥
 
 
अनुवाद
"वह पूरी रात जागता रहा और रोता रहा। सुबह वह हमारे पास आया और यह दलील दी।
 
"He stayed up all night and cried. In the morning he came to us and pleaded like this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)