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श्लोक 3.4.39  |
सब रात्रि क्रन्दन क रि’ कैल जागरण ।
प्रातः - काले आमा - दुँहाय कैल निवेदन ॥39॥ |
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| अनुवाद |
| "वह पूरी रात जागता रहा और रोता रहा। सुबह वह हमारे पास आया और यह दलील दी। |
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| "He stayed up all night and cried. In the morning he came to us and pleaded like this." |
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