श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.4.37 
तोमा - दुँहार आज्ञा आमि केमने लङ्घिमु ।
दीक्षा - मन्त्र देह’ कृष्ण - भजन करिमु ॥37॥
 
 
अनुवाद
वल्लभ ने उत्तर दिया, 'मेरे प्रिय भाइयों, मैं आपकी आज्ञा का उल्लंघन कैसे कर सकता हूँ? मुझे कृष्ण मंत्र की दीक्षा दीजिए ताकि मैं भगवान कृष्ण की भक्ति कर सकूँ।'
 
Vallabha replied, "O dear brothers, how can I disobey your orders? Please initiate me into the Krishna mantra, so that I can practice Krishna devotion."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)