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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट
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श्लोक 30
श्लोक
3.4.30
सेइ अनुपम - भाइ शिशु - काल हैते ।
रघुनाथ - उपासना करे दृढ़ - चित्ते ॥30॥
अनुवाद
“बचपन से ही मेरा छोटा भाई अनुपम रघुनाथ [भगवान रामचन्द्र] का बहुत बड़ा भक्त था और वह बड़ी दृढ़ता से उनकी पूजा करता था।
“My younger brother Anupam was a great devotee of Raghunath (Lord Ramachandra) since his childhood and he worshipped him with great fervor.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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