श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.4.29 
हेन वंश घृणा छाड़ि’ कैला अङ्गीकार ।
तोमार कृपाय वंशे मङ्गल आमार ॥29॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, आपने मेरे परिवार के प्रति द्वेष न रखते हुए मुझे अपना सेवक स्वीकार किया है। आपकी दया से ही मेरे परिवार में सुख-समृद्धि है।
 
"O Lord, you have accepted me as your servant without despising my family. It is only by your grace that my family is blessed."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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