vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट
»
श्लोक 24
श्लोक
3.4.24
कुशल - वार्ता महाप्रभु पुछेन सनातने ।
तेंह कहेन, - “परम मङ्गल देखिनु चरणे” ॥24॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सनातन से उनकी कुशलक्षेम पूछी। सनातन ने उत्तर दिया, "सब कुछ मंगलमय है, क्योंकि मैंने आपके चरणकमलों के दर्शन किए हैं।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked Sanatana Goswami about his well-being. Sanatana replied, “All is well, for I have had the darshan of your lotus feet.”
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd