श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  3.4.232 
जीव - गोसाञि गौड़ हैते मथुरा चलिला ।
नित्यानन्द - प्रभु - ठाञि आज्ञा मागिला ॥232॥
 
 
अनुवाद
जब जीव गोस्वामी बंगाल से मथुरा जाना चाहते थे, तो उन्होंने श्रील नित्यानंद प्रभु से अनुमति मांगी।
 
When Jiva Goswami wished to go from Bengal to Mathura, he asked Srila Nityananda Prabhu for permission.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)