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श्लोक 3.4.224  |
‘उज्ज्वल - नीलमणि’ - नाम ग्रन्थ कैल आर ।
राधा - कृष्ण - लीला - रस ताहाँ पाइये पार ॥224॥ |
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| अनुवाद |
| श्रील रूप गोस्वामी ने उज्ज्वला-नीलमणी नामक ग्रंथ भी संकलित किया, जिससे श्रीराधा और कृष्ण के प्रेम प्रसंगों को पूर्णतः समझा जा सकता है। |
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| Srila Rupa Goswami also compiled a book called Ujjawal Neelmani, from which we can understand the heights of love behavior of Sri Sri Radha Krishna. |
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