श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  3.4.208 
ये - काले विदाय हैला प्रभुर चरणे ।
दुइ - जनार विच्छेद - दशा ना याय वर्णने ॥208॥
 
 
अनुवाद
जब सनातन गोस्वामी और श्री चैतन्य महाप्रभु एक दूसरे से विदा ले रहे थे, तब जो विरह दृश्य घटित हुआ, वह इतना करुण है कि उसका वर्णन यहाँ नहीं किया जा सकता।
 
When Sanatana Goswami and Sri Chaitanya Mahaprabhu took leave of each other, the scene of separation that ensued cannot be described here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)